वैसे तो गुरु की नियमित पूजा करनी चाहिए लेकिन अनेक बार दूर होने पर यह संभव नहीं हो पाता है जिनके लिए यह संभव नहीं है वह गुरु पूर्णिमा के दिन अनिवार्य रूप से अपने गुरु की पूजा करें।
सनातन परंपरा के अनुसार गुरु को ईश्वर से भी उच्च स्थान दिया गया है इसी संदर्भ में कहा जाता है कि
गुरु गोविंद दोनों खड़े, काके लागू पाय ।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो मिलाय ।।
यदि सामने भगवान और गुरु दोनों खड़े हैं तो भी पहले अपने गुरु का चरण वंदन करना चाहिए क्योंकि गुरु के कारण ही साक्षात भगवान के दर्शन हो पाते हैं।
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गुरु पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है
पौराणिक गाथाओं एवं शास्त्रों के अनुसार अनेक ग्रंथों की रचना करने वाले वेदव्यास जिन्हें मानव जाति का गुरु भी माना जाता है, उनका जन्म आज से लगभग 3000 ई. पूर्व आषाढ़ महीने की पूर्णिमा तिथि को हुआ था। तब से ही गुरुओं के मान सम्मान एवं उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने हेतु आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है।गुरु पूर्णिमा पर क्या होता है
गुरु पूर्णिमा पर गुरु देव की पूजा आराधना का विधान है, इस दिन गुरु के प्रति सम्मान को प्रकट किया जाता है। गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के प्रारंभ में आषाढ़ मास की पूर्णिमा को आती है इस दिन से 4 मार्च तक साधु संत एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते रहते हैं। इन 4 महीनों का मौसम भी अच्छा होता है क्योंकि इन 4 मास में ना अधिक गर्मी और ना ही अधिक सर्दी होती है इसीलिए यह समय अध्ययन काल के लिए भी उपयुक्त समय है। इन 4 महीनों में जिस प्रकार सूर्य के ताप से तपी हुई भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है उसी प्रकार इन चार मास में गुरु चरणों में उपस्थित रहकर साधकों को ज्ञान, शांति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है।गुरु पूर्णिमा का महत्व क्या है (Importance of Guru Purnima)
सनातन संस्कृति में गुरुओं को ब्रह्मांड के तीन प्रमुख देवता ब्रह्मा विष्णु और महेश के समान पूजनीय माना जाता है, पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार गुरु को ब्रह्मा के समान माना गया है। 84 लाख योनियों में से मनुष्य योनि को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इसीलिए मनुष्य योनि में प्रत्येक मनुष्य को किसी एक विशेष व्यक्ति को गुरु बनाना बहुत आवश्यक है क्योंकि गुरु ही अपने शिष्य के सारे अंधकार मिटाते हुए उसको सही राह दिखाता है।
गुरु सर्वदा परम पूजनीय है गुरु पूर्णिमा पर गुरु का आशीर्वाद प्राप्त कर लेने मात्र से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। जीवन में सही मार्ग बताने वाले गुरु ही होते हैं जो मनुष्य के जीवन को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले कर जाते हैं। गुरु का मार्गदर्शन ही व्यक्ति को महान और श्रेष्ठ बनाता है।
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गुरु पूजन ( Guru Pujan)
जहां तक संभव हो इस दिन गुरु के समक्ष जाकर ही उनका पूजन वंदन करें। गुरु के चरण कमलों को स्वच्छ जल से धोकर उन पर पुष्प, अक्षत एवं चंदन से उनकी पूजा अर्चना करें। पूजा करने के पश्चात उन्हें मिठाई एवं फल भेंट करें साथ ही यथासंभव दक्षिणा भी भेंट करें। एक गुरु ही है जो आपकी गलतियों को नजरअंदाज करके आप के अंधकार को मिटाता है इसीलिए अपने द्वारा की गई समस्त गलतियों के लिए उनसे क्षमा प्रार्थना अवश्य करें। इस दिन पूर्णतया भाव विभोर होकर अपने आपको अपने गुरु को सौंपकर उनकी सेवा करें और उन्हें प्रसन्न करें।अपने गुरु से जो लोग दूर हैं एवं किसी कारणवश अपने गुरु का पूजन वंदन करने नहीं जा सकते या आपके गुरु ब्रह्मलीन हो गए हो तो आप इस दिन अपने घर की उत्तर दिशा में सफेद वस्त्र पर अपने गुरु का चित्र या चरण पादुका रख देवें तत्पश्चात उन्हें फूलों की माला पहना कर मिठाई का भोग लगाएं, गुरू की आरती कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें।


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