पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मानसरोवर झील सबसे पहले सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा के मन में उत्पन्न हुई थी, इसीलिए इसका नाम मानसरोवर है। मानसरोवर दो शब्दों से मिलकर बना है जिन का अर्थ है मन का सरोवर। मानसरोवर पहाड़ो से घिरी हुई झील है जो पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में क्षीरसागर के नाम से वर्णित है।
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| कैलाश मानसरोवर झील |
कैलाश मानसरोवर भारत के तिब्बत क्षेत्र में स्थित है जोकि अभी चीन के कब्जे में है। कैलाश मानसरोवर कैलाश माउंटेन रेंज में 21778 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित है। कैलाश पर्वत तिब्बत की हिमालय रेंज में स्थित है इसके पश्चिम में मानसरोवर एवं दक्षिण में रक्षा दल झील है। यहीं से भारत नेपाल पाकिस्तान तथा बांग्लादेश की जीवनदायिनी नदियां ब्रह्मपुत्र सिंधु सतलज निकलती है।
कैलाश पर्वत की चोटियों के बीच स्थित झील को मानसरोवर झील के नाम से जाना जाता है।कैलाश मानसरोवर झील लगभग 320 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई है
माना जाता है शिव का निवास स्थान

महादेव

मानसरोवर पर भगवान शिव जी का स्थान माना जाता है, कहते हैं भगवान शिव का कैलाश पर्वत पर वास है। कई लोग जिन्होंने यहाँ की यात्रा की है और अनुभव किया है वे अपने अनुभव से बताते है कि साक्षात महादेव है विराजमान इस स्थान पर।
इस दिव्य स्थान पर प्रकाश की तरंगों एवम ध्वनि की तरंगों का अद्भुत समागम होता है जो ॐ की ध्वनि उत्पन्न करता है।
इस दिव्य स्थान पर प्रकाश की तरंगों एवम ध्वनि की तरंगों का अद्भुत समागम होता है जो ॐ की ध्वनि उत्पन्न करता है।
कैलाश मानसरोवर एक ऐसा स्थान है जहां पर भगवान शिव और माता पार्वती का घर माना जाता है। मानसरोवर के पास स्थित कैलाश पर्वत पर भगवान शिव का धाम है, यह वही स्थान है जहां पर बाबा महादेव विराजते हैं। पुराणों के अनुसार यहां महादेव का स्थाई निवास होने के कारण इस स्थान को 12 ज्योतिर्लिंगों मैं सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
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| कैलाश पर्वत |
कैलाश मानसरोवर मंदिर
कैलाश मानसरोवर भगवान शिव, माता पार्वती और उनके पुत्र गणेश का निवास स्थान माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि संपूर्ण स्थान पर महादेव विराजते हैं यहां के कण-कण में शंकर है।
कैलाश पर्वत पर है शक्ति पीठ
कैलाश पर्वत पर देवी सती के शरीर का दाया हाथ गिरा था इसीलिए यहां पर एक पाषाण शिला को मां सती का रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है मां सती का दाया हाथ गिरने के कारण एक शक्तिपीठ यह भी माना गया है।
ॐ पर्वत

ॐ पर्वत
ॐ पर्वत कैलाश मानसरोवर का एक ॐ के आकार में एक पर्वत है जो अधिकतर बादलों से घिरा रहता है। यह पर्वत तिब्बत, नेपाल और भारत की सीमाएं जिस स्थान पर मिलती है उसी स्थान पर ॐ पर्वत है। ॐ पर्वत पर एक प्राकृतिक तरीके से ॐ बनता है जहाँ अलग अलग तरीके से ॐ की आठ आकृतियां बनती है। सबसे ज्यादा हैरानी की बात तो यह है कि इस पर्वत पर बर्फ गिरने से प्राकृतिक रूप से ॐ की ध्वनि उत्पन्न होती है। इस ॐ पर्वत को आदि कैलाश और छोटा कैलाश भी कहा जाता है।
सूर्य की किरणों से पर्वत पर बन जाता है ॐ
कैलाश पर्वत पर सूर्य की पहली किरण जैसे ही पड़ती है यह स्वर्ण की तरह चमक उठता है और इस पर्वत पर बर्फ से ॐ बन जाता है जिसे स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।भगवान शिव ने इसी स्थान पर काटा था गणेश जी का सिर
कैलाश वह स्थान है जहां भगवान शिव ने गणेश जी का सिर धड़ से अलग किया था। पुराणों के अनुसार इस स्थान पर माता पार्वती ने गणेश जी को अपना पहरेदार बनाया था और गणेश जी ने भगवान शिव को कैलाश के अंदर जाने से रोक दिया था जिससे क्रोधित होकर भगवान शिव ने गणेश जी का सिर उनकी धड़ से अलग कर दिया था।हाथी का बलिदान
गणेश जी का सिर कटने के पश्चात माता पार्वती ने बहुत क्रोध किया था जिसके पश्चात भगवान विष्णु ने गणेश जी को अन्य किसी का सिर लगाकर जीवित करने का उपाय बताया। इसी स्थान पर एक हाथी की मृत्यु बलिदानात्मक रूप से गणेश जी को सिर देने के लिए हुई थी ताकि उस हाथी का सिर गणेश जी को लगाकर उन्हें पुनः जीवित किया जा सके।कैलाश मानसरोवर खूबसूरती के साथ-साथ यह अध्यात्म का भी केंद्र है, यहां पर तप और जप करने से उनका 100 गुना ज्यादा फल प्राप्त होता है । पौराणिक ग्रंथों के अनुसार जहां पर भगवान शिव की अलौकिक ऊर्जा विद्यमान है जिससे यहां पर तप और जप करना बहुत ही फलदायक है। जैनियों के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव ने इसी पर्वत के अष्टपाद नामक स्थान पर तप करके मोक्ष प्राप्त किया था। ऐसा माना जाता है कि यहाँ आकर ध्यान करने वाले को मोक्ष प्राप्त होता है, यहाँ की जाने वाली तपस्या मोक्ष प्रदान करने वाली होती है। यह स्थान साधकों द्वारा साधना करने के लिए प्रमुख स्थान माना जाता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार यह आकाशीय ध्रुव और भौगोलिक ध्रुव का केंद्र बिंदु है एवं दशों दिशाएं यहां आकर मिलती है इसीलिए यहां पर अलौकिक शक्ति का प्रवाह है। चाहे जो भी हो यह जगह बहुत ही पवित्र, शांत और शक्ति प्रदान करने वाली है, धर्म चाहे जो भी हो सच तो यही है कि, इस जगह पर खुद ब खुद श्रद्धा से सिर झुक जाता है
भारत का अद्भुत स्थान है पराशर झील और मंदिर, दिखाई देते है दैवीय शक्ति के प्रमाण
कैलाश पर चढ़ते ही होने लगता है दिशा भ्रम, बढ़ने लगते है बाल और नाखून
कैलाश पर्वत काफी रहस्यमई स्थान है और इसको लेकर काफी रहस्यमई बातें भी कही जाती है। इस स्थान पर अनेक बार पर्वतारोही पर्वतारोहण के लिए आए हैं उनमें से एक पर्वतारोही ने अपनी किताब में लिखा था कि इस स्थान पर रहना असंभव है इस स्थान पर किसी अनजाने कारण से दिशा का ज्ञान नहीं रहता और दिशा भ्रम होने लग जाता है यहां तक की चुंबकीय कंपास भी धोखा देने लग जाता है। इस स्थान पर व्यक्ति के शरीर के बाल और नाखून ज्यादा तेजी से बढ़ने लगते हैं यह स्थान बहुत ही ज्यादा रेडियो एक्टिव है।
ऊपर स्वर्गलोक और नीचे मृत्युलोक
पुराणों के अनुसार पृथ्वी लोक पर यह कैलाश पर्वत मृत्यु लोक और स्वर्ग लोक के केंद्र बिंदु पर स्थित है कैलाश पर्वत के नीचे मृत्युलोक है और ऊपर स्वर्ग लोक विद्यमान है। यह बात तो वैज्ञानिकों ने भी साबित कर दी है कि पृथ्वी का केंद्र बिंदु है इसके ऊपर उत्तरी ध्रुव और नीचे दक्षिण ध्रुव समान दूरी पर स्थित है।
जब मात्र 8 पग में पूरी हो गयी थी कैलाश यात्रा
जैन धर्म के अनुसार उनके आदिनाथ ऋषभदेव का निर्वाण स्थल अष्टपद कैलाश पर ही स्थित है ऐसा कहा जाता है कि ऋषभदेव ने मात्र 8 पग में कैलाश की यात्रा की थी।
सिखों के लिए है पवित्र स्थान
सिख गुरु नानक देव ने इस स्थान पर कुछ दिन रुको कर ध्यान किया था इसीलिए इस स्थान को सिखों के लिए भी पवित्र स्थान माना गया है।कैलाश पर्वत की चारों दिशाओं में नदियों का उदगम
कैलाश पर्वत के चारो ओर नदियों का उद्गम स्थल है। इसकी चारों दिशाओं में ब्रम्हपुत्र, सिंधु, सतलज और करनाली नदियों का उदगम स्थल है। इन नदियों से ही गंगा, सरस्वती सहित चीन की अन्य नदिया भी निकलती है।कैलाश पर्वत के चारों दिशाओं में अलग अलग पशु पक्षी के मुख है जिनसे इन नदियों का उदगम होता है। पूर्व दिशा में अश्वमुख, पश्चिम दिशा में हाथी का मुख, उत्तर दिशा में सिंह का मुख और दक्षिण दिशा में मोर का मुख है।
कल्पवृक्ष
कैलाश पर्वत की तलछटी में कल्पवृक्ष लगा हुआ है। इसके केंद्र में जो वृक्ष लगा हुआ है उसके फलों में शारीरिक और मानसिक रोगों का उपचार करने वाले चिकित्सकीय गुण विद्यमान है।कैलाश पर्वत के पूर्व भाग को क्रिस्टल, पश्चिम भाग को रूबी, उत्तर भाग को स्वर्ण और दक्षिण भाग को नीलम रूप में माना जाता है।
क्यों आज तक नहीं चढ़ पाया कैलाश पर्वत पर इंसान
विश्व का सबसे ऊंचा पर्वत माउण्ट एवरेस्ट है जिसकी ऊंचाई लगभग 8800 मीटर है वही कैलाश पर्वत की ऊंचाई इससे लगभग 2200 मीटर कम है, बावजूद इसके माउण्ट एवरेस्ट पर 7000 से अधिक लोग चढ़ाई कर चुके है लेकिन कैलाश पर्वत अभी तक अजेय है। यानी कि अभी तक कोई भी इंसान कैलाश पर्वत पर नहीं चढ़ सका है। इस पर रिसर्च करने वाले अनेक वैज्ञानिकों ने बताया है कि इस पर चढ़ पाना असंभव है।कैलाश मानसरोवर रहस्य जिन्हें कम ही जानते है लोग
- धरती का केंद्र बिंदु : कैलाश पर्वत हिमालय का केंद्रर बिंदु है जिसके एक और उत्तरी ध्रुव तो दूसरी और दक्षिणी ध्रुव है वैज्ञानिकों के अनुसार यह धरती का केंद्र बिंदु है ।
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अलौकिक शक्ति का केंद्र : इस
स्थान को एक एक्सिस मुंडी के नाम से भी जाना जाता है एक्सिफ मुंडी अर्थात
आकाशीय ध्रुव और भौगोलिक ध्रुव का केंद्र बिंदु। इस एक्सिस मुंडी को दुनिया
की नाभि भी कहा जाता है। यह पृथ्वी और आकाश का वह केंद्र बिंदु है जहां
दसों दिशाएं मिलती है रसिया के एक वैज्ञानिक के अनुसार एक्सेस मुंडी वह
स्थान है जहां पर अलौकिक शक्तियोंं का प्रवाह होता है जिनसे आप सम्पर्क भी
कर सकते हैं।

पिरामिड कैलाश
- पिरामिड के रूप में है यह पर्वत : कैलाश पर्वत एक विशालकाय पिरामिड के रूप में है जो छोटे-छोटे 100 पिरामिड का केंद्र है। एकांत स्थान पर स्थित कैलाश पर्वत की संरचना कम्पास के 4 बिंदुुओ के समान है।
- कैलाश पर्वत शिखर पर कोई नहीं चढ़ सकता : कैलाश पर्वत अभी तक अजेय है। इस पर्वत पर अभी तक कोई भी इंसान चढ़ाई नहीं कर पाया है जिन जिन पर्वतारोही ने इन पर चढ़ने की कोशिश की है उन्होंने बताया है कि इस पर चढ़ना असंभव है।
- दो रहस्यमयी सरोवर : कैलाश पर्वत पर मुख्य रूप से 2 सरोवर विद्यमान है। पहला मानसरोवर जो कि दुनिया की शुद्ध पानी की उच्चतम जिलों में से एक है तो वही, दूसरा राक्षस नामक झील जो दुनिया की खारे पानी की उच्चतम झीलों में से एक है। मानसरोवर का आकार सूर्य के समान है तो वहीं राक्षस झील का आकार चंद्र के समान है। यह दोनों ही जिले सौर और चंद्र चंद्र बल को प्रदर्शित करती है जिसका संबंध सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ऊर्जा से है।
- चारों दिशाओं में अलग अलग जानवरों के मुख : कैलाश पर्वत के चारों दिशाओं में चार अलग अलग मुँह लगे हुए हैं जो चार नदियों का उदगम स्थल है। दक्षिण दिशा में मोर का मुख, उत्तर दिशा में सिंह का मुख, पश्चिम दिशा में हाथी का मुख और पूर्व दिशा में अश्व का मुख है जो ब्रम्हपुत्र, सिन्धु, सतलज और करनाली इन चारों नदियों के उदगम स्थल है।
- पुण्यात्माएं करती है निवास : इस पवित्र स्थान के आसपास केवल पुण्य आत्माएं ही राह सकती है। धर्म ग्रंथो और तिब्बत के मंदिर के धर्मगुरुओं के अनुसार कैलाश पर्वत के चारों ओर एक अलौकिक शक्ति का प्रवाह है, जिसमे तपस्वी आज भी आध्यात्मिक गुरुओं के साथ टेलीपैथिक तरीके से सम्पर्क करते हैं।
- सुनाई देती है डमरू और ॐ की ध्वनि : कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील क्षेत्र में आपको निरन्तर डमरू और ॐ जैसी ध्वनि सुनाई देगी। वैज्ञानिकों के अनुसार यह ध्वनि बर्फ के पिघलने की हो सकती है या फिर प्रकाश और ध्वनि के बीच इस तरह का समागम होता है कि यहाँ से ॐ की ध्वनि उत्पन्न होती है।
- आसमान में लाइट का चमकना : अनेक बार कैलाश पर्वत पर 7 तरह की लाइटें आसमान में चमकती हुई देखी गयी है। नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसा यहाँ के चुम्बकीय बल के कारण हो सकता है।
- येति मानव या हिम मानव रहस्य : हिमालय वासियों और वहाँ के आसपास के इलाकों के लोगों के अनुसार हिमालय पर येति रहते है जिन्हें यहा जंगली मानव और हिम मानव भी कहा जाता है। यहा पर ऐसी धारणा भी प्रचलित है कि यह लोगों को मारकर खा जाता है। दुनिया के लगभग 30 से भी ज्यादा वैज्ञानिकों और अनुसंधानकर्ताओं ने दावा किया है कि हिमालय के बर्फीले इलाके में हिम मानव रहते है।
- कस्तूरी मृग रहस्य : कस्तूरी मृग दुनिया का सबसे दुर्लभ मृग है जिसकी कस्तूरी बहुत ही सुगंधित और औषधीय गुणों से भरपूर होती है। यह कस्तूरी उसके शरीर के पिछले हिस्से की ग्रंथि में एक पदार्थ के रूप में होती है जो बहुत ही महँगी होती है। यह मृग उत्तर भारत, चीन, तिब्बत, साइबेरिया और मंगोलिया में ही पाया जाता है।








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