08 June, 2020

तिलक कैसे और क्यों लगाया जाता है, दिन के अनुसार लगाये यह शुभ तिलक खुल जायेगी किस्मत


दोस्तों आपने अक्सर देखा होगा कि अनेक व्यक्ति तिलक लगाते हैं आपने गौर किया होगा की अनेक व्यक्तियों के तिलक भिन्न भिन्न प्रकार के होते हैं जैसे किसी के बिंदी लगी हुई होती है तो किसी के त्रिपुंड बना हुआ होता है तो किसी के अर्धचंद्राकार तिलक लगे होते हैं। तिलक अक्सर किसी भी शुभ कार्य से पूर्व माथे पर लगाया जाता है शास्त्रों के अनुसार किसी भी व्यक्ति द्वारा बिना तिलक लगाए कोई भी शुभ कार्य अथवा पूजा कर्म इत्यादि करने पर पूर्ण फल नहीं मिलता है।

तिलक कहाँ लगाया जाता है
तिलक हमेशा भाल पर दोनों भौहों के मध्य आज्ञा चक्र पर लगाते हुए ऊपर की ओर होना चाहिए इसके अतिरिक्त शरीर के अन्य स्थानों पर भी तिलक लगाया जाता है जैसे गले पर, दोनों बाहों पर, कानों पर, छाती पर आदि जगह। इसे चेतना केंद्र भी कहा जाता है। धार्मिक तिलक स्वयं के द्वारा लगाया जाता है, जबकि सांस्कृतिक तिलक दूसरा लगाता है।

तिलक किसका लगाया जा सकता है/ तिलक के प्रकार
तिलक हमेशा चंदन या कुमकुम से ही करना चाहिए, सिंदूर, केशर, अष्टगंध और भस्म का तिलक लगाना भी श्रेष्ठ है। इनके अलावा नदी तट की मिट्टी का, पुण्य तीर्थ का, चींटी की बांबी का, तुलसी के मूल की मिट्टी का या गोपी चंदन का भी तिलक लगाया जाता है।

तिलक किस अंगुली से लगाना चाहिए :
मोक्ष प्राप्ति के लिए तिलक अंगूठे से शत्रु नाश करने के लिए तर्जनी से धन प्राप्त करने के लिए मध्यमा से और शांति प्राप्त करने के लिए अनामिका उंगली से तिलक लगाया जाना चाहिए।
ब्रह्माण्ड पुराण के अनुसार तिलक में, अंगुठे के प्रयोग से – शक्ति, मध्यमा के प्रयोग से – दीर्घायु, अनामिका के प्रयोग से- समृद्धि तथा तर्जनी से लगाने पर – मुक्ति प्राप्त होती है।
देवताओं पर केवल अनामिका उंगली से तिलक बिन्दु लगाया जाता है और शिवलिंग पर तर्जनी मध्यमा और अनामिका से त्रिपुंड बनाया जाता है।

सामान्य तिलक का आकार :
धार्मिक तिलक के समान ही हमारे पारिवारिक या सामाजिक चर्या में तिलक इतना समाया हुआ है कि इसके अभाव में हमारा कोई भी मंगलमय कार्य हो ही नहीं सकता। इसका रूप या आकार दीपक की ज्योति, बाँस की पत्ती, कमल, कली, मछली या शंख के समान होना चाहिए। धर्म शास्त्र के ग्रन्थों के अनुसार इसका आकार दो से दस अंगुल तक हो सकता है। तिलक से पूर्व ‘श्री’ स्वरूपा बिन्दी लगानी चाहिये उसके पश्चात् अंगुठे से विलोम भाव से तिलक लगाने का विधान है, अंगुठा दो बार फेरा जाता है।


तिलक के मध्य में चावल :
आपने देखा होगा कि तिलक के मध्य में चावल भी लगाये जाते हैं। तिलक के चावल शिव के परिचायक हैं जिससे लाल तिलक पर सफेद चावल धारण कर हम जीवन में शिव व शक्ति के साम्य का आशीर्वाद ग्रहण करते हैं।
शव के मस्तक पर रोली तिलक के मध्य चावल नहीं लगाते, क्योंकि शव में शिव तत्त्व समाहित है लेकिन शक्ति का नहीं ऐसे में वहाँ शिव शक्ति साम्य की मंगल कामना का कोई अर्थ ही नहीं है।।

तिलक लगाने का मंत्र :
तिलक लगाने के लिए निम्न मंत्र का उच्चारण किया जाना चाहिए
केशवानन्न्त गोविन्द बाराह पुरुषोत्तम ।
पुण्यं यशस्यमायुष्यं तिलकं मे प्रसीदतु ।।

कान्ति लक्ष्मीं धृतिं सौख्यं सौभाग्यमतुलं बलम् ।
ददातु चन्दनं नित्यं सततं धारयाम्यहम् ।।


तिलक क्यों लगाया जाता है या तिलक का महत्व :
हिन्दु परम्परा में मस्तक पर तिलक लगाना शूभ माना जाता है
इसे सात्विकता का प्रतीक माना जाता है। बिना तिलक के तीर्थ स्नान करना, जप कर्म करना, दान कर्म करना, यज्ञ हवन करना, पित्र हेतु श्राद्ध कर्म एवं देवताओं की पूजा अर्चना करना यह सभी निष्फल है।

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हमारे शरीर में सूक्ष्म ऊर्जा के 7 केंद्र होते हैं जिनमें अपार शक्ति भंडार है इन्हें चक्र कहा जाता है। दोनों भौंहों के बीच में जहां तिलक लगाते हैं वह आज्ञा चक्र होता है, यहां पर शरीर की प्रमुख तीन नाड़ीयां इडा, पिंगला और सुषुम्ना आकर मिलती है जिस कारण इसे त्रिवेणी या संगम भी कहा जाता है। यहीं से पूरे शरीर का संचालन होता है और यह हमारी चेतना का मुख्य स्थान भी है। इस स्थान पर तिलक लगाने से स्वभाव में सुधार आता है वह देखने वाले पर सात्विक प्रभाव भी पड़ता है।

तिलक लगाने का वैज्ञानिक महत्व :
चंदन का तिलक लगाने से दिमाग में शांति, तरावट एवं शीतलता बनी रहने के साथ-साथ मस्तिष्क में सेराटोनिन व बीटाएंडोरफिन नामक रसायनों का संतुलन भी बना रहता है साथ ही मेघाशक्ति बढ़ती है तथा मानसिक थकावट विकार नहीं होता है।

शरीर शास्त्र के अनुसार हमारी दोनों भौहों के मध्य में पीनियल ग्रंथि का स्थान होता है तथा इस स्थान पर हमारा आज्ञा चक्र विद्यमान थे। इस स्थान पर तिलक लगाने से हमारी पीनियल ग्रंथि उद्दीप्त होती है और हमारे मस्तिष्क के अंदर एक अलग ही तरह के प्रकाश की अनुभूति होती है पीनियल ग्रंथि के उद्दीपन से ही आज्ञा चक्र का उद्दीपन होता है।

हमारे पूर्वज और ऋषिगण इस बात को भलीभाँति जानते थे पीनियल ग्रन्थि के उद्दीपन से आज्ञाचक्र का उद्दीपन होगा । इसी वजह से धार्मिक कर्मकाण्ड, पूजा-उपासना व शूभकार्यो में टीका लगाने का प्रचलन से बार-बार उस के उद्दीपन से हमारे शरीर में स्थूल-सूक्ष्म अवयन जागृत हो सकें ।

तिलक किस दिन किसका लगाये
  • सोमवार    :-      सफेद चंदन और विभूति या भस्म
  • मंगलवार  :-       लाल चंदन या चमेली तेल मिश्रित सिंदूर
  • बुधवार      :-      सूखा सिंदूर
  • गुरुवार      :-      केशर मिश्रित सफेद चंदन, हल्दी या गोरोचन
  • शुक्रवार     :-     लाल चंदन या सिंदूर
  • शनिवार    :-      लाल चंदन या विभूति या भस्म
  • रविवार     :-      लाल चंदन या हरि चंदन

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