मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 32 किलोमीटर दूर स्थित भोजपुर नामक गांव में भोजेश्वर मंदिर स्थित है जिसे भोजपुर मंदिर भी कहा जाता है। इस मंदिर के निकट पड़े बड़े पत्थरों पर इस मंदिर की बड़ी कार्य योजनाओं को उकेरा गया है ! इन पत्थरों पर मंदिर के विस्तृत मानचित्र भी बनाए हुए हैं, जिनको देखकर लगता है कि यदि इस मंदिर का निर्माण पूरा हो जाता तो यह मंदिर परिसर भारत के सबसे बड़े मंदिर परिसरों में एक होता।
मंदिर का निर्माण
पौराणिक मत
इतिहासकारों के अनुसार इस भोजेश्वर मंदिर की स्थापना पांडवों के द्वारा की गई मानी जाती है कहा जाता है कि पांडवों द्वारा अपनी माता कुंती के द्वारा भगवान शिव की पूजा करने के लिए इस मंदिर का निर्माण किया था। इस मंदिर पर एक विशाल शिवलिंग है जिसके बारे में कहा जाता है कि यह शिवलिंग भीम ने बनवाया कुंती के लिए। पांडवों ने इस मंदिर के निर्माण का एक ही रात्रि में पूरा करने का संकल्प दिया गया था जो पूरा नहीं हो सका इस कारण यह मंदिर आज तक अधूरा है।
निर्माण आधुनिक मत
कुछ इतिहासकारों का कहना है कि इस मंदिर का निर्माण 11 वीं शताब्दी में परमार वंश के राजा भोज देव ने करवाया। गांव का नाम भोजपुर राजा भोज देव के नाम से ही पड़ा था। मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर एक ही रात में निर्मित होना था किंतु इसकी छत का काम पूरा होने के पहले ही सुबह हो गई इसलिए मंदिर का काम अधूरा ही रह गया।
मंदिर निर्माण का परित्याग / अधूरे मंदिर का अबूझ रहस्य
इस मंदिर को देखकर ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण कार्य एकदम से रोक दिया गया होगा हालांकि किन कारणों से इस मंदिर का निर्माण अधूरा है इसका सही कारण पता नहीं लगाया जा सका है। इतिहास विदो पुरातत्व विदो एवं वास्तु विदो का अनुमान है कि ऐसा किसी प्राकृतिक आपदा संसाधनों की कमी अथवा किसी युद्ध के आरंभ हो जाने के कारण ही हुआ होगा। कुछ का तो यह भी कहना है कि हो सकता है राजा भोज देव का निधन हो गया हो जिससे उस मंदिर का निर्माण जहाँ था वही रुक गया।
भोजेश्वर मंदिर संग्रहालय
भोजेश्वर मंदिर के पास ही 200 मीटर की दूरी पर इस मंदिर से संबंधित एक संग्रहालय बना हुआ है इस संग्रहालय में चित्र पोस्टर एवं रेखा चित्र के माध्यम से मंदिर के तथा राजा भोज देव के शासन और उनके इतिहास को बताया गया है संग्रहालय में राजा भोज के शासन की जानकारी उनके द्वारा एवं उनके ऊपर लिखी हुई अन्य लेखकों की पुस्तकें तथा मंदिर के शिल्पकारों के चिन्ह भी मिलते हैं। इस संग्रहालय को प्रातः 10 बजे से शाम 5 बजे तक कोई भी जा कर निशुल्क देख सकता है।
विश्व का सबसे बड़ा प्राचीन शिवलिंग ( World Biggest Shivaling)
भोजेश्वर मंदिर में बहुत बड़ा और एक विशाल आकार का शिवलिंग है जो कि एक ही चिकने लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया है। यह एक ही पत्थर पर बना विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग है यही नहीं यह शिवलिंग सबसे प्राचीन शिवलिंग भी माना जाता है।
आधार सहित इस शिवलिंग की कुल ऊंचाई 40 फीट से अधिक है। शिव लिंग की लंबाई 7.5 फीट तथा व्यास 17.8 फिट है। यह शिवलिंग 21.5 फिट चौड़ी जलहरी पर स्थापित है।
इस विशाल शिवलिंग के कारण ही भोजेश्वर मंदिर को उत्तर भारत का सोमनाथ और मध्यप्रदेश का सोमनाथ भी कहा जाता है।
भोजेश्वर मंदिर : होता देश का सबसे बड़ा शिव मंदिर
भोजेश्वर मंदिर का निर्माण किन कारणों से रुका था यह एक अबूझ पहेली है लेकिन यदि इस मंदिर का पूर्ण निर्माण हो गया होता तो यह देश का सबसे बड़ा शिव मंदिर होता हालांकि देश की सबसे बड़ी शिवलिंग यहीं पर विद्यमान है।
भोजपुर महोत्सव / भोजपुर का मेला (Bhojeshwar Fastival )
भोजेश्वर मंदिर के यहां प्रतिवर्ष दो बार मेले का आयोजन होता है प्रथम मेला मकर संक्रांति पर्व पर वह दूसरा मेला महाशिवरात्रि पर्व के समय होता है महाशिवरात्रि के पर्व पर तो यहां तीन दिवसीय भोजपुर महोत्सव के नाम से मेले का आयोजन किया जाता है।
फैक्ट्स (Facts)
मंदिर का निर्माण
पौराणिक मत
इतिहासकारों के अनुसार इस भोजेश्वर मंदिर की स्थापना पांडवों के द्वारा की गई मानी जाती है कहा जाता है कि पांडवों द्वारा अपनी माता कुंती के द्वारा भगवान शिव की पूजा करने के लिए इस मंदिर का निर्माण किया था। इस मंदिर पर एक विशाल शिवलिंग है जिसके बारे में कहा जाता है कि यह शिवलिंग भीम ने बनवाया कुंती के लिए। पांडवों ने इस मंदिर के निर्माण का एक ही रात्रि में पूरा करने का संकल्प दिया गया था जो पूरा नहीं हो सका इस कारण यह मंदिर आज तक अधूरा है।
निर्माण आधुनिक मत
कुछ इतिहासकारों का कहना है कि इस मंदिर का निर्माण 11 वीं शताब्दी में परमार वंश के राजा भोज देव ने करवाया। गांव का नाम भोजपुर राजा भोज देव के नाम से ही पड़ा था। मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर एक ही रात में निर्मित होना था किंतु इसकी छत का काम पूरा होने के पहले ही सुबह हो गई इसलिए मंदिर का काम अधूरा ही रह गया।
मंदिर निर्माण का परित्याग / अधूरे मंदिर का अबूझ रहस्य
इस मंदिर को देखकर ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण कार्य एकदम से रोक दिया गया होगा हालांकि किन कारणों से इस मंदिर का निर्माण अधूरा है इसका सही कारण पता नहीं लगाया जा सका है। इतिहास विदो पुरातत्व विदो एवं वास्तु विदो का अनुमान है कि ऐसा किसी प्राकृतिक आपदा संसाधनों की कमी अथवा किसी युद्ध के आरंभ हो जाने के कारण ही हुआ होगा। कुछ का तो यह भी कहना है कि हो सकता है राजा भोज देव का निधन हो गया हो जिससे उस मंदिर का निर्माण जहाँ था वही रुक गया।
भोजेश्वर मंदिर संग्रहालय
भोजेश्वर मंदिर के पास ही 200 मीटर की दूरी पर इस मंदिर से संबंधित एक संग्रहालय बना हुआ है इस संग्रहालय में चित्र पोस्टर एवं रेखा चित्र के माध्यम से मंदिर के तथा राजा भोज देव के शासन और उनके इतिहास को बताया गया है संग्रहालय में राजा भोज के शासन की जानकारी उनके द्वारा एवं उनके ऊपर लिखी हुई अन्य लेखकों की पुस्तकें तथा मंदिर के शिल्पकारों के चिन्ह भी मिलते हैं। इस संग्रहालय को प्रातः 10 बजे से शाम 5 बजे तक कोई भी जा कर निशुल्क देख सकता है।
विश्व का सबसे बड़ा प्राचीन शिवलिंग ( World Biggest Shivaling)
भोजेश्वर मंदिर में बहुत बड़ा और एक विशाल आकार का शिवलिंग है जो कि एक ही चिकने लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया है। यह एक ही पत्थर पर बना विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग है यही नहीं यह शिवलिंग सबसे प्राचीन शिवलिंग भी माना जाता है।
आधार सहित इस शिवलिंग की कुल ऊंचाई 40 फीट से अधिक है। शिव लिंग की लंबाई 7.5 फीट तथा व्यास 17.8 फिट है। यह शिवलिंग 21.5 फिट चौड़ी जलहरी पर स्थापित है।
इस विशाल शिवलिंग के कारण ही भोजेश्वर मंदिर को उत्तर भारत का सोमनाथ और मध्यप्रदेश का सोमनाथ भी कहा जाता है।
भोजेश्वर मंदिर : होता देश का सबसे बड़ा शिव मंदिर
भोजेश्वर मंदिर का निर्माण किन कारणों से रुका था यह एक अबूझ पहेली है लेकिन यदि इस मंदिर का पूर्ण निर्माण हो गया होता तो यह देश का सबसे बड़ा शिव मंदिर होता हालांकि देश की सबसे बड़ी शिवलिंग यहीं पर विद्यमान है।
भोजपुर महोत्सव / भोजपुर का मेला (Bhojeshwar Fastival )
भोजेश्वर मंदिर के यहां प्रतिवर्ष दो बार मेले का आयोजन होता है प्रथम मेला मकर संक्रांति पर्व पर वह दूसरा मेला महाशिवरात्रि पर्व के समय होता है महाशिवरात्रि के पर्व पर तो यहां तीन दिवसीय भोजपुर महोत्सव के नाम से मेले का आयोजन किया जाता है।
फैक्ट्स (Facts)
- मंदिर की अधूरी बनी हुई छत चार स्तंभों पर टिकी हुई है जिनकी ऊंचाई 40 फीट है।
- मंदिर के निकट पड़े पत्थरों पर मंदिर योजना से संबंधित नक्शों से पता चलता है कि भोजेश्वर मंदिर के विस्तृत चबूतरे पर मंदिर के अन्य हिस्से मंडप महामंडल तथा अंतराल बनाने की योजना भी थी।
- भोजपुर शिव मंदिर के ठीक सामने पश्चिमी दिशा में एक गुफा है जोकि पार्वती गुफा के नाम से विख्यात है।
- इस मंदिर में और इसके आसपास अनेक ऐसी मूर्तियां से जो की बहुत ही पुरातात्विक महत्व रखती है।
- इस मंदिर में लगे एक शिलालेख पर राजा भोज का नाम लिखा हुआ है।
- बेतवा नदी के किनारे बना यह भोजेश्वर शिव मंदिर उच्च कोटि की वास्तुकला का नमूना है।
- भोजेश्वर मंदिर के निर्माण के समय पीछे के भाग में विशाल पत्थरों को ढोने के लिए एक ढलान बनाया गया था। पूरे विश्व में कही भी भारी पत्थरों को मंदिर के ऊपर तक पहुंचाने के लिए ऐसी प्राचीन भव्य निर्माण तकनीक उपलब्ध नहीं है। इस तकनीक को देखकर ही प्रमाणित किया गया कि लगभग 100 टन वजन वाले विशाल पत्थरों को मंदिर के शीर्ष तक कैसे पहुंचाया गया होगा।
- इस मंदिर का दरवाजा किसी अन्य हिंदू इमारतों के दरवाजों में सबसे बड़ा है।
- इस मंदिर में है विश्व का सबसे बड़ा एक ही पत्थर से निर्मित शिवलिंग



Bahut sundar janakari boss
ReplyDeleteVery informative knowledgable history
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