पराशर झील का इतिहास (Parashar Jhil History)
पराशर झील कहाँ पर है
पराशर झील हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला मुख्यालय से तकरीबन 56 किलोमीटर की दूरी पर स्तिथ है। यह झील मंडी जिले के बागी गांव से महज 7 किलोमीटर की दूरी पर है।
पराशर झील का निर्माण
कहा जाता है कि पाराशर झील का निर्माण ऋषि पराशर ने जमीन पर अपना गुर्ज दे मारा था जिससे इसका निर्माण हुआ है। पराशर झील के निर्माण के ठोस सबूत तो नहीं है लेकिन यह माना जाता है कि जब से सृष्टि का निर्माण हुआ है तभी से यह झील बनी हुई है।
पराशर झील की ऊंचाई
पराशर झील 9100 पेट की ऊंचाई पर बनी हुई है। आश्चर्य की बात तो यह है कि इतनी ऊंचाई में बनी इस झील में पानी का आगमन और निकास कहां है, यह किसी को नहीं पता है। इस झील में पानी कहां से आता है और कहां चला जाता है, यह किसी को पता नहीं है और यहां पानी भरा हुआ भी नहीं रहता है।
पराशर झील की गहराई
पराशर झील की गहराई अभी तक कोई नहीं ना आप पाया है।विज्ञान के लिए यह खोज का विषय भी है लेकिन कोई भी वैज्ञानिक अभी तक इस स्थान तक नहीं पहुंच पाए हैं। इतिहासकारों के अनुसार बताया जाता है कि सदियों पूर्व में यहां के एक राजा ने झील की गहराई को रस्सियों से नापने की कोशिश की थी लेकिन वह सफल नहीं हो पाए। ऐसा भी बताया जाता है कि कुछ दशक पूर्व एक विदेशी महिला ने इसे नापने की कोशिश की और ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर इस झील की गहराई में भी गई थी लेकिन उस समय उसके साथ अंग्रेजी में बात करने वाला कोई नहीं था जिस कारण यह मालूम नहीं हो सका कि वह झील में कितने नीचे तक गई है और इसके अंदर के क्या रहस्य है।
पराशर ऋषि की तपोभुमी है
पुराणों के अनुसार इस स्थान पर ऋषि पराशर ने तप किया था, यह ऋषि पराशर की तपोभुमी है। इस स्थान पर ऋषि पराशर के तप के कारण यहाँ का वातावरण बहुत ही ऊर्जावान और चमत्कारी है। इस स्थान पर कई ऐसे प्राचीन प्रमाण मौजूद है जो यहाँ दैवीय चमत्कार होने का आभास करते है।
पराशर ऋषि का मंदिर (Parashar Rishi Mandir)
इस स्थान पर ऋषि पराशर का शानदार मंदिर बना हुआ है। यह मंदिर 14वी और 15वी शताब्दी में मंडी रियासत के तत्कालीन राजा बानसेन ने बनवाया। यह मंदिर मंडी क्षेत्र के देवता को समर्पित एक प्राचीन पगौड़ा शैली में बना हुआ मंदिर है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण लगभग 12 साल में हुआ था और केवल एक ही देवदार पेड़ के उपयोग से बनाया गया था।
मंदिर के कक्ष में ऋषि पराशर, भगवान विष्णु, महादेव और महिषासुर मर्दिनी माँ दुर्गा की मूर्तियां स्थापित है।
पास ही है गणेश मंदिर
मंदिर से कुछ किलोमीटर दूरी पर भटवाड़ी नामक स्थान पर गणेश जी का मंदिर है। इस क्षेत्र में यदि बारिश नही होती है तो पुरानी परम्परा के अनुसार गणेश जी की वंदना की जाती है। यह वंदना बहुत ही पुरानी है जो राजा के समय भी करवाई जाती थी और आज सेकड़ो वर्षो बाद भी हो रही है।
पराशर में तैरने लगा जमीन का टुकड़ा
भोजेश्वर मंदिर भोपाल, मध्यप्रदेश (Bhojeshwar Mandir Bhopal, madhyapradesh)
दैवीय शक्ति का प्रमाण है पराशर झील में
पराशर झील के मध्य में एक भूखंड है जो यहां किसी देवी शक्ति के होने का प्रमाण देता है और एक प्रकार से पृथ्वी के अनुपात को भी दर्शाता है। यह भूखंड एक स्थान पर नहीं रह कर चलता रहता है पराशर मंदिर कमेटी के प्रधान बलवीर ठाकुर और वहां के मुख्य पुजारी अमर सिंह बताते हैं कि वर्षों पहले यह भूखंड सुबह पूर्व की तरफ होता था और शाम को चलकर पश्चिम की तरफ आ जाता था। यह भूखंड कभी कुछ महीनों के लिए एक ही स्थान पर रुक जाता है तो कभी चलने लग जाता है।
पराशर झील पर बर्फबारी (Snowfall on Parashar Lake)
सर्दियों के दिनों में पराशर झील व यहां के आसपास इलाकों में बर्फबारी भी होती है, यहां पर बर्फबारी होने से यह झील जम जाती है। इस झील का नजारा देखकर यहां हर कोई आकर्षित हो जाता है। हालांकि कभी-कभी भारी बर्फबारी होने के कारण यहां पर सेवाएं बाधित हो जाती है जिससे यहां आने जाने के लिए पर्यटकों को मौसम सही होने पर ही आने दिया जाता है।
खूबसूरत होने के साथ ही भरपूर एडवेंचर (Beautiful place for Adventures)
किसी भी मौसम में जाने पर पराशर झील और
मंदिर का नजारा अद्भुत दिखाई देता है। तीनो ही ऋतु में यहाँ का दृश्य बहुत ही मनभावन लगता है।
पराशर झील और यहां की सुंदरता को देखने का अपना एक अलग ही एहसास और अनुभव है। इस झील में तैरता हुआ एक वृत्ताकार भूखंड झील की खूबसूरती में ओर भी चार चांद लगा देता है। पैगोडा शैली में यहां बना हुआ तीन मंजिला भव्य मंदिर यहां की खूबसूरती को बढ़ा देता है वही मंदिर के बाहरी और स्तंभों की नक्काशी बहुत ही काबिले तारीफ है जो उस समय की कला के अद्भुत नमूने को पेश करती है। पराशर झील एक पसंदीदा पिकनिक स्थान भी है जहां पर साल भर आपको लोगों की भीड़ मिल जाएगी। सर्दियों के मौसम में तो यहां की ट्रैकिंग बहुत ही एडवेंचर होती है क्योंकि उस दौरान यह झील पूरी तरह से जम जाती है। इस स्थान पर एक विश्रामगृह भी है जहां आप रुक कर इन हसीन वादियों का नजारा कैद कर सकते हैं।
सोलो ट्रैवलिंग के लिए परफेक्ट स्थान (Perfect place for solo Travelling)
यह स्थान सोलो ट्रैवलिंग के लिए एक परफेक्ट स्थान है जो बहुत ही खूबसूरत और एडवेंचर्स है। जब भी यहां आने का प्लान बनाएं तो दिसंबर से फरवरी के बीच ही बनाएं क्योंकि इस समय यह पराशर झील बर्फ से ढकी हुई होती है जिससे आप सोलो ट्रैकिंग का भरपूर आनंद ले पाएंगे। अप्रैल से मई महीने में भी यहां आकर आप जमकर मस्ती कर सकते हैं और आनंद उठा सकते हैं।
ध्यान रखने योग्य बातें
वहाँ पर घूमते आपको इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है






bahut achhi jankari hindi me mili dhanywad
ReplyDeleteNo. Blogger he boss... Baaki par to bakwas news aati hai
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