धर्म के अनुसार तीन प्रमुख देव हुए हैं, ब्रह्मदेव, भगवान विष्णु और भगवान शिव (महादेव) यह तीनों देव मिलकर त्रिदेव कहलाए हैं। भगवान ब्रह्मा सृष्टि के रचयिता है भगवान विष्णु सृष्टि के पालनहार और भगवान शिव सृष्टि के विनाशक है। अन्य धर्मों में देव को GOD की संज्ञा दी गई है यह शब्द भी इन त्रिदेव की व्याख्या करता है, G - Generator (रचना करने वाला, रचयिता), O - Operator (चलाने वाला, पालनहार) D - Destroyer (विनाश करने वाला, विनाशक) ।
भगवान विष्णु ने धर्म के पालन और रक्षा हेतु हर काल में समय समय पर अवतार लिया है। भगवान विष्णु ने अनेक अवतार लिए हैं लेकिन उनके 10 अवतार ऐसे हैं जो प्रमुख माने जाते हैं।
भगवान विष्णु के दशावतार
मत्स्य अवतार भगवान श्रीहरि विष्णु का पहला अवतार है जिसमें भगवान विष्णु ने मछली के रूप में अवतार लिया था। पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु ने सृष्टि को प्रलय से बचाने और समुंद्र की गहराई में छुपे हुए वेदों को निकाल कर उन्हें फिर से स्थापित करने के लिए यह अवतार लिया था। जब कृतयुग में प्रलय आया था, मत्स्य अवतार भगवान विष्णु ने उस प्रलय से सृष्टि को बचाया था। समय आने पर मत्स्य के अवतार में भगवान विष्णु ने कृतयुग के राजा सत्यव्रत को तत्वज्ञान का उपदेश दिया था जो मत्स्य पुराण के नाम से प्रसिद्ध हे।
कच्छप अवतार को कूर्म अवतार भी कहा जाता है, इस अवतार में भगवान श्री हरि विष्णु ने कछुए के रूप में अवतार लिया था। भगवान विष्णु ने यह अवतार समुंद्र मंथन के दौरान लिया था, इस अवतार के कारण ही समुद्र मंथन हो पाया था। समुंद्र मंथन देवताओं और दैत्यों ने मिलकर किया था।
समुंद्र मंथन करने के लिए मंदराचल पर्वत को मथानी एवं नागराज वासुकी को नेती बनाया गया था। देवताओं और दैत्यों ने मंदराचल पर्वत को समुंद्र में डाल कर नागराज वासुकी को नेती बनाया लेकिन मंदराचल पर्वत के नीचे कोई आधार नहीं होने के कारण वह समुद्र में डूबने लगा जिसके बाद भगवान श्री हरि विष्णु विशाल कछुए का रूप धारण कर समुंद्र में मंदराचल पर्वत के आधार बन गए। भगवान कच्छप की विशाल पीठ पर मंदराचल पर्वत तेजी से घूमने लगा जिसके कारण ही समुद्र मंथन संपन्न हुआ।
समुंद्र मंथन में भगवान विष्णु, मंदराचल पर्वत और वासुकी नाग की मदद से ही संपन्न हो पाया जिसमें देवताओं और दैत्यों ने अनमोल रत्न पाए थे।
शास्त्रों और धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु के 10 अवतारों में तीसरा अवतार वराह अवतार था। इस अवतार में भगवान श्री हरि विष्णु ने वराह का रूप धारण करके अवतार लिया था। भगवान विष्णु ने यह अवतार पृथ्वी को बचाने और दैत्य हिरण्याक्ष का वध करने के लिए लिया था।
पुरातन समय में राक्षस हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को ले जाकर गहरे समुद्र में कहीं छिपा दिया था तब ब्रह्मदेव की नाक से भगवान विष्णु ने वराह रूप में अवतार लिया। देवताओं और ऋषि मुनियों के आग्रह पर भगवान वराह ने पृथ्वी को ढूंढना प्रारंभ किया ! भगवान वराह शुकर के रूप में अवतरित है जिससे उन्होंने अपनी थूथनी की सहायता से पृथ्वी का पता लगा लिया और समुंद्र के अंदर जाकर पृथ्वी को बाहर ले आए। जब हिरण्याक्ष दैत्य ने यह देखा तो वराह भगवान को युद्ध के लिए ललकारा, भगवान वराह ने हिरण्याक्ष का वध कर दिया इसके बाद भगवान वराह ने अपने खुर से जल को स्तंभित कर उस पर पृथ्वी को स्थापित किया।
भगवान विष्णु के 10 अवतारों में चौथा अवतार भगवान नृसिंह के रूप में था। इस अवतार में भगवान विष्णु आधे शेर और आधे मनुष्य बनकर प्रकट हुए थे, इसमें भगवान का चेहरा शेर का था और शरीर इंसान का था। भगवान विष्णु ने यह अवतार दैत्यों के राजा हिरण्यकश्यप को मारने के लिए लिया था क्योंकि हिरण्यकश्यप को ना मनुष्य से, ना देवता से, नहीं पशु या पक्षी से, ना दिन में, ना रात में, ना धरती पर, ना आकाश में, न अस्त्र से, ना शस्त्र से मरने का वरदान प्राप्त था।
भगवान नरसिंह ने हिरण्यकश्यप को शाम के समय अपने जंगो पर रखकर अपने नाखूनों से मारा था क्योंकि उस समय न दिन था न रात थी। वह न जमीन पर था ना आसमान में था भगवान नृसिंह न देवता थे ना मनुष्य नहीं पशु पक्षी और उनके नाखून ना अस्त्र थे नहीं शस्त्र थे। भगवान नरसिंह ने हिरण्यकश्यप को मार कर जगत कल्याण किया एवं अपने परम भक्त प्रहलाद को बचाया था।
भगवान विष्णु ने यह अवतार सतयुग में लिया था। सतयुग में भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद के पौत्र दैत्य राजबली ने स्वर्ग लोक पर आक्रमण कर अपना अधिकार जमा लिया था जिससे सभी देवता इस विपत्ति से बचने के लिए भगवान विष्णु के पास गए। तब भगवान विष्णु ने एक छोटे ब्राह्मण बालक के रूप में अवतार लिया जो वामन अवतार कहलाया।
भगवान वामन राजा बलि के पास गए और भिक्षा में तीन पग जमीन मांगी, राजा बलि अपने दान देने के कारण भी प्रसिद्ध था जिस कारण उसने भगवान वामन को तीन पग धरती दान देने का संकल्प ले लिया। भगवान वामन ने विशाल रूप धारण कर एक पग में धरती और दूसरे पग में स्वर्ग लोक को नाप लिया, जब तीसरा पग रखने के लिए कोई स्थान नहीं बचा था तो राजा बलि ने भगवान वामन को अपने सिर पर पग रखने के लिए कहा, राजा बलि के सिर पर पग रखने के कारण वह सुतललोक में पहुंच गया। राजा बलि की दानवीरता देखकर भगवान वामन ने उसे सुतललोक का स्वामी भी बना दिया था।
भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में एक अवतार भगवान परशुराम का है, भगवान विष्णु ने रेणुका और रघुवंशी जमदग्नि के पुत्र के रूप में परशुराम अवतार लिया था। जमदग्नि के पुत्र होने के कारण इन्हें जामदग्न्य भी कहते हैं। भगवान विष्णु ने यह अवतार अहंकारी क्षत्रियों के विध्वंस से संसार को बचाने के लिए लिया था।
प्राचीन समय में महिष्मति नगरी पर शक्तिशाली हेयय वंशी राजा कार्तवीर्य अर्जुन जिसे सहस्त्रबाहु के नाम से भी जाना जाता था का शासन था। सहस्त्रबाहु बहुत ही अभिमानी और अत्याचारी राजा था। भगवान परशुराम ने इस सहस्त्रबाहु का वध करने के लिए ही अवतार लिया था। भगवान परशुराम ने कई बार धरती को क्षत्रिय विहीन कर दिया था।
भगवान विष्णु के प्रमुख 10 अवतारों में सातवां अवतार भगवान श्री राम के रूप में था। भगवान विष्णु ने यह अवतार त्रेता युग में अयोध्या के राजा दशरथ और उनकी पत्नी रानी कौशल्या के पुत्र के रूप में लिया था।
इस युग में राक्षस राज रावण का बहुत आतंक था, साथ ही अनेक राक्षसों का भी आतंक था जो ऋषि-मुनियों का वध कर देते थे। इस श्रीराम अवतार में भगवान विष्णु ने राक्षस राज रावण और अनेक राक्षसों का वध किया और मर्यादा का पालन करते हुए अपना जीवन यापन किया इसीलिए भगवान श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम भी कहलाये ।
भगवान श्री हरि विष्णु के प्रमुख 10 अवतारों में आठवां अवतार भगवान श्री कृष्ण का है जो मथुरा में माता देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में प्रकट हुए थे। भगवान विष्णु ने यह अवतार द्वापर युग में अधर्मियों का नाश करने के लिए और धर्म की पुनः स्थापना करने के लिए लिया था।
द्वापर युग में मथुरा के राजा कंस का बहुत ही आतंक था जो रिश्ते में उनके मामा लगते थे, लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने कंस के आतंक के कारण कंस का वध किया। वही महाभारत के युद्ध में पांडवों का साथ दिया और अर्जुन के सारथी भी बने थे। महाभारत युद्ध में धर्म को जीता कर पुनः धर्म की स्थापना की। श्री कृष्ण अवतार में ही भगवान विष्णु ने गीता ज्ञान दिया।
भगवान विष्णु के 10 अवतारों में एक अवतार बुद्ध भी है इनको गौतम बुद्ध और महात्मा बुद्ध भी कहा जाता है। भगवान विष्णु का यह अवतार बौद्ध धर्म के संस्थापक माने जाते हैं जो कि संसार के चार बड़े धर्मों में से एक है। इनका जन्म क्षत्रिय कुल के शाक्य नरेश शुद्धोधन के पुत्र के रूप में हुआ था।लेकिन पुराणों में वर्णित भगवान बुध देव का जन्म गया के समीप कीकट में हुआ बताया गया है और उनके पिता का नाम अजन बताया गया है।
एक समय दैत्यों की शक्ति बहुत बढ़ गई थी क्योंकि दैत्य वैदिक आचरण एवं महायज्ञ करने लग गए थे। तब भगवान विष्णु ने देवताओं के हित के लिए बुद्ध का अवतार लिया, उनके हाथ में मार्जनी थी और वह मार्ग को बुहारते हुए चलते थे। इस अवतार में भगवान विष्णु बुद्ध के रूप में दैत्यों के पास पहुंचे और उन्हें उपदेश दिया कि यज्ञ करना पाप है, यज्ञ से जीव हिंसा होती है क्योंकि यज्ञ की अग्नि से कितने ही जीव भस्म हो जाते हैं। भगवान बुद्ध के उपदेश से दैत्य प्रभावित हुए और उन्होंने यज्ञ और वैदिक आचरण छोड़ दिया। यज्ञ और वैदिक आचरण छूटने की कारण उनकी शक्ति कमजोर हो गई जिससे देवताओं ने उन पर हमला कर पुनः धर्म राज्य स्थापित किया।
भगवान विष्णु के 10 प्रमुख अवतारों में 1 अवतार कल्कि रूप में है जो भविष्य में अवतरित होगा। यह अवतार कलयुग और सतयुग के संधि काल में होगा और यह अवतार 64 कलाओं से युक्त होगा।
पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु का यह अवतार तपस्वी ब्राह्मण के घर होगा जो कि कल्कि की के नाम से जाना जायेगा। भगवान कल्कि देवदत्त नामक घोड़े पर सवार होकर संसार से पापियों का विनाश करेंगे और धर्म की पुनः स्थापना करेंगे तभी सतयुग का प्रारंभ होगा।
भगवान विष्णु के ये दस अवतार बताते है जीव उत्पत्ति से मानव विकास को
- पहला अवतार मत्स्य यानी कि मछली जो पानी से सम्बंधित है और वैज्ञानिक तौर पर जीवन पानी से ही आरंभ हुआ है।
- दूसरा अवतार कूर्म यानी कछुआ जीवन पानी से जमीन पर आया ये जीव पानी और जल दोनों में विचरण कर सकते थे जिन्हें उभयचर कहा गया। कछुए ने समुन्द्र से जमीन की ओर विकास को दर्शाया है।
- तीसरा अवतार वराह जो जंगली जानवर के रूप में था ये दर्शाता है जमीन पर आने के बाद जंगली जीवों की उत्पत्ति हुई जैसे डायनासौर आदि कहा गया।
- चौथा अवतार था नृसिंह नृसिंह अवतार में आधे पशु और आधे मानव थे जो दर्शाते हैं कि जंगली जानवरों से बुद्धिमान जानवरो का विकास।
- पाँचवा अवतार था वामन बौना जो वास्तव में लंबा बढ़ सकता था। क्या आप जानते हो ऐसा क्यों है? क्योंकि मनुष्य दो प्रकार के होते थे होमो इरेक्टस(नरवानर) और होमो सेपिअंस (मानव), और होमो सेपिअंस ने विकास की लड़ाई जीत ली और बाद में लंबे हुए।
- छठा अवतार था परशुराम जिनके पास शस्त्र कुल्हाड़ी और परसे की ताकत थी। परशुराम अवतार उस मानव को दर्शाते हैं जो गुफाओं में और वनों में रहा और जो गुस्सेल और कम सामाजिक व्यवहार वाले थे।
- सातवाँ अवतार था श्रीराम ये दर्शाते हैं सोच युक्त सामाजिक व्यक्ति को जो समाज के नियम बनाये और समस्त रिश्तों के आधार पर चले और मर्यादाओ का पालन करते हुए आगे बढ़े।
- आठवां अवतार श्री कृष्ण जो राजनेता, राजनीतिज्ञ और प्रेमी व्यक्ति को दर्शाते हैं। जिन्होंने यह दर्शाया कि समाज के बने नियमो का किस प्रकार से आनंद लेते हुए सामाजिक ढांचे में रहकर कैसे फला फुला जा सकता है।
- नवां अवतार महात्मा बुद्ध वे व्यक्ति जिन्होंने नृसिंह से उठे मानव के सही स्वभाव को खोजा और और मानव द्वारा ज्ञान की खोज की।
- दसवां अवतार आएगा 'कल्कि' वह मानव जिस पर वैज्ञानिक काम कर रहे है वह मानव, जो आनुवंशिक रूप से श्रेष्ठतम होगा और कलाओं में निपुण होगा।







Bahut sundar
ReplyDeleteBhut accha sir ji.. apne bilkul shi jaankari di..
ReplyDeleteजोरदार
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