10 May, 2017

Motivational Quote of Maharana Pratap (महाराणा प्रताप के प्रेरक उद्धरण)

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महाराणा प्रताप

1. मनुष्य का गौरव और उसका आत्मसम्मान उसकी सबसे बड़ी कमाई होती है, अतः हमेशा इनकी रक्षा करनी चाहिए।
2. "मातृभूमि और अपने माँ मे तुलना करना और अन्तर समझना निर्बल और मुर्खो का काम है।"

3. "सम्मानहीन मनुष्य एक मरे हुए व्यक्ति के समान होता है।"

4. "ये संसार कर्मवीरो की ही सुनता है, अतः अपने कर्म के मार्ग पर अडिग और प्रशस्त रहो।"

5. "समय इतना बलवान होता है, कि एक राजा को भी जंगलो मे घुमा सकता है।"
 

6. "समय एक ताकतवर और साहसी को ही अपनी विरासत देता है, अतः अपने रास्ते पर हमेशा डटे रहो।"
 

7. "हल्दीघाटी के युध्द ने मेरा सर्वस्व छीन लिया हो, पर मेरा गौरव और मेरी शान को ओर अधिक बढा दिया।" 

8. "जो सुख मे अतिप्रसन्न और विपत्ति मे डर के आगे झुक जाते है, उन्हे ना सफलता मिलती है और न ही इतिहास मे जगह।" 

9. "अपने अच्छे समय मे अपने कर्म से इतने विश्वास पात्र बना लो कि बुरा वक्त आने पर वे विश्वासपात्र  उसे भी अच्छा बना दे।"

10. "जो अत्यंत विकट परिस्थिति मे भी झुक कर हार नही मानते, वो हार कर भी जीते होते है।"

11. "अगर सर्प से प्रेम रखोगे तो भी वो अपने स्वभाव के अनुसार आपको डसेगा ही।" 

12. "शत्रु हमेशा सफल और शौर्यवान व्यक्ति के ही होते है।" 

13. "एक शासक का पहला कर्तव्य अपने राज्य का गौरव और सम्मान को बचाने का होता है।" 

14. "तब तक परिश्रम करते रहो जब तक तुम्हे तुम्हारी मंजिल की प्राप्ति न हो जाये।"

15. "अपनी कीमती जीवन को सुख और आराम कि जिन्दगी बनाकर कर नष्ट करने से अच्छा है कि अपने राष्ट्र कि सेवा करो।"

16. "मनुष्य अपने कठिन परिश्रम और कष्टों से ही अपने नाम को अमर कर सकता है।" 

17. "अपने और अपने परिवार के अलावा जो अपने राष्ट्र के बारे मे सोचे वही सच्चा नागरिक होता है।" 

18. "अगर इरादा नेक और मजबूत है, तो मनुष्य कि पराजय नही विजय होती है।" 

19. "कष्ट, विपत्ति और संकट ये जीवन को मजबूत और अनुभवी बनाते है, इनसे डरना नही बल्कि प्रसन्नता पूर्वक इनका सामना करना चाहिए।" 

20. "सत्य, परिश्रम और संतोष सुखमय जीवन के साधन है, परन्तु अन्याय के विरोध के लिए हिंसा भी आवश्यक है। " 

21. "रोज अपने लक्ष्य, परिश्रम और आत्मशक्ति को याद करने पर सफलता का मार्ग स्वतः ही सरल हो जाता है।" 

22. "गौरव, मान- मर्यादा और आत्मसम्मान से बढकर कीमती जीवन को भी नही समझना चाहिए।" 

23. "अपनो से बड़ो के आगे झुककर समस्त संसार को झुकाया जा सकता है।"

24. "अन्याय, अधर्म आदि का विनाश करना पूरे मानव जाति का कर्तव्य है।"

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